प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं, जहां वे न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की वार्षिक बैठक में भाग लेंगे। इस मौके पर उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने की संभावना है, जिसमें दोनों नेता व्यापार और टैरिफ से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। मौजूदा समय में भारत-अमेरिका के रिश्तों में खिंचाव की स्थिति है, ऐसे में यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे में अन्य प्रमुख वैश्विक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे, जिनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का नाम भी सामने आया है। UNGA शिखर सम्मेलन की शुरुआत 23 सितंबर से होने वाले सप्ताह में होगी, जब दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष न्यूयॉर्क पहुंचेंगे।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं पीएम मोदी से मुलाकात के इच्छुक हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री इस यात्रा को व्यापारिक और कूटनीतिक, दोनों उद्देश्यों से देख रहे हैं। यदि यह बैठक तय होती है, तो मोदी व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को भारत में प्रस्तावित QUAD सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण भी दे सकते हैं, जो अक्टूबर में संभावित है।
अगर यह बैठक होती है, तो यह दोनों नेताओं की सात महीनों में दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था। ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों के बीच घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध बने, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों ने रिश्तों में खटास पैदा कर दी है, भले ही ट्रंप कई बार मोदी को अपना “दोस्त” कह चुके हैं।
व्यापार, टैरिफ और रूसी तेल को लेकर तनाव
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर विवाद अभी भी जारी है। मुख्य रुकावट भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने को लेकर है, जिस पर भारत सहमत नहीं है। इसी दौरान, ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया और रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा कर दी, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है।
इनमें से पहला चरण 7 अगस्त से लागू हो चुका है, जबकि शेष शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होंगे। इस समयसीमा से पहले दोनों देशों के अधिकारी तेज़ी से वार्ता कर रहे हैं ताकि किसी समाधान पर पहुंचा जा सके।
रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी आपत्ति
भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने पर अमेरिका ने अपनी नाखुशी जताई है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद करता है। ट्रंप प्रशासन भारत पर दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात में कटौती करे, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था पर असर पड़े।
भारत ने अमेरिका की इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका स्वयं रूस से यूरेनियम, फर्टिलाइज़र और अन्य रसायन खरीदता है, जो एक दोहरा मापदंड दर्शाता है। अब भारत की नजर 15 अगस्त को ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित बैठक पर टिकी है, जिसमें दोनों नेता तीन वर्षों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।